Loan Rejection Reason – सिबिल स्कोर 750+ है फिर भी हो रहा लोन रिजेक्ट, सिबिल ही नहीं ये भी चेक करते हैं बैंक वाले

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Written by Praveen Singh

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Loan Rejection Reason: आज के समय में बढ़ते खर्चों के चलते किसी को भी आकस्मिक पैसों की आवश्यकता पड़ सकती है। इन खर्चों में मेडिकल इमरजेंसी, शिक्षा, बच्चों की शादी, ट्रैवल और त्यौहार आदि के खर्चों के लिए अधिकतर लोग बैंक या वित्तीय संस्थानों से लोन लेकर अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करते हैं। हालांकि बैंक यूंही हर किसी को लोन जारी नही करता हैं, बैंक से लोन के लिए इसकी निर्धारित पात्रताओं को पूरा करना जरूरी होता है। इसमें लोन के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति का अच्छा क्रेडिट स्कोर एक अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि एक अच्छा क्रेडिट स्कोर कम ब्याज पर लोन मिलने की संभावना को बढ़ा देता है।

हालांकि कुछ मामलों में अच्छा क्रेडिट होने के बाद भी बैंक आवेदक का लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट हो जाता है। ऐसे में बहुत से लोगों को इसके पीछे का कारण समझ नही आता की अच्छे सिबिल स्कोर पर भी उनका लोन क्यों रिजेक्ट (Loan Rejection Reason) हुआ है। आपको बता दें अच्छे सिबिल स्कोर पर भी लोन रिजेक्ट होने के कई कारण हो सकते हैं, इस लेख के माध्यम से हम आपको ऐसी कुछ स्थितियां जिनमे बैंक लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट कर देता है, उनकी जानकारी प्रदान करेंगे, जिसके लिए आप लेख को पूरा अवश्य पढ़ें।

सिबिल स्कोर 750+ पर लोन रिजेक्शन के कारण (Loan Rejection Reason)

जैसा की 750 या उससे अधिक का सिबिल स्कोर एक अच्छा स्कोर माना जाता है और इस पर लोन देने वाले संस्थाएं आसानी से लोन मंजूर कर देती हैं। हालांकि सिबिल स्कोर चेक करने के बाद भी बैंक लोन के लिए कई और मुख्य कारकों को ध्यान में रखते हुए लोन देना चाहिए या नहीं इसके अंतिम निर्णय तक पहुंचता है, तो चलिए जानते हैं ऐसे कुछ मुख्य कारणों की पूरी जानकारी।

Loan Rejection Reason - सिबिल स्कोर 750+ है फिर भी हो रहा लोन रिजेक्ट, सिबिल ही नहीं ये भी चेक करते हैं बैंक वाले

सिबिल रिपोर्ट में टिप्पणियां

कई बार लोन के रिजेक्ट होने के एक कारण सिबिल रिपोर्ट में टिप्पणियों को नजरंदाज करना भी हो सकता है। आपको बता दें सिबिल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट, चाहे वह क्रेडिट स्कोर हो या क्रेडिट सूचना रिपोर्ट या सूचना रिपोर्ट यह ऋणदाता को लोन सुनिश्चित करने में एक अहम भूमिका निभाती हैं, वहीं यदि सिबिल स्कोर के इस रिपोर्ट में किसी तरह अवलोकन होता है, तो ऋणदाता इस पर ध्यान देते हैं। ऐसे में सिबिल जेनरेटिड रिपोर्ट में यह टिप्पणियां जैसे लोन का निपटान नियमों और शर्तों से हटकर करना या मध्य अवधि से कम ब्याज दर के लिए अनुरोध करना आदि लोन अप्रूवल की संभावना को नुकसान पहुंचाती है।

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एंप्लॉयमें हिस्ट्री और स्टेटस

बैंक द्वारा किसी भी आवेदक को लोन जारी करने से पहले यह देखा जाता है, की उधारकर्ता के पास कब से रोजगार है या वह कब से काम कर रहे हैं। इसके साथ ही आवेदक वर्तमान में किस कंपनी में कार्यरत हैं या जिस कंपनी में वह काम कर रहे हैं वह समय पर अपने एंप्लॉयी को सैलरी देती है या नही आदि मुख्य कारकों को ध्यान में रखते हुए बैंक आवेदक का लोन मंजूर करता है। वहीं यदि आवेदक के पास एक नियमित रोजगार नही है तो इस स्थिति बैंक द्वारा लोन रिजेक्ट भी किया जा सकता है।

सिबिल रिपोर्ट में टिप्पणियां

कई बार लोन के रिजेक्ट होने के एक कारण सिबिल रिपोर्ट में टिप्पणियों में नजरंदाज करना भी हो सकता है। आपको बता दें सिबिल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट, चाहे वह क्रेडिट स्कोर हो या क्रेडिट सूचना रिपोर्ट या सूचना रिपोर्ट यह ऋणदाता ओ लोन सुनिश्चित करने में एक अहम भूमिका निभाते हैं, बढ़ी यदि सिबिल स्कोर के इस रिपोर्ट में किसी तरह अवलोकन होता है, तो ऋणदाता इस पर ध्यान देते हैं। ऐसे में सिबिल जेनरेटिड रिपोर्ट में यह टिप्पणियां जैसे लोन का निपटान नियमों और शर्तों से हटकर करना या मध्य अवधि से कम ब्याज दर के लिए अनुरोध करना आदि लोन अप्रूवल की संभावना को नुकसान पहुंचाती है।

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डिफॉल्टर लोन का गारंटर होना

अगर आप किसी के लोन के पक्षकार (Gaurantor) हैं तो ऐसी स्थिति में बैंक या वित्तीय संस्था से लिए गए लोन के भुगतान में किसी तरह की चूक उधारकर्ता और गारंटर दोनों के क्रेडिट इतिहास पर प्रभाव डालती है। यानी भले ही ऋण आपके नाम पर ना लिया गया हो लेकिन गारंटर के रूप में आपका भी सिबिल स्कोर प्रभावित होगा। इससे यदि आप जब भी लोन के लिए भविष्य में आवेदन करते हैं तो डिफॉल्ट लोन पर आपकी गारंटी ऋणदाता के लिए दिन रिजेक्ट करने का एक कारण बन सकती है। ऐसे में किसी भी उधारकर्ता का गारंटर बनने से पहले उसकी पुनर्भुगतान क्षमता सुनिश्चित करना एक बेहतर विकल्प होता है।

डेट टू इनकम रेश्यो

डेट टू इनकम रेश्यो (DTI) वह अनुपात है जो लोन लेने वाले व्यक्ति के लोन भुगतान करने की क्षमता का पता लगाने में मदद करता है। यह रेश्यो व्यक्ति की सकल मासिक आय के आधार पर निकाला जाता है। आपको बता दें DTI व्यक्ति द्वारा चुकाए जा रहे सभी कर्ज की पेमेंट को मासिक आय से भाग करने के बाद जो प्रतिशत मिलता है, उसे डेट टू इनकम रेश्यो कहा जाता है। बैंक द्वारा इसे लोन देने से पहले मुख्य तौर पर देखा जाता है। ऐसे में यदि उधारकर्ता का डीटीआई बेहतर नही है तो उनके लोन के रिजेक्ट होने की संभावनाएं अधिक हो सकती है।

अनियमित कर भुगतान इतिहास

ऐसे आवेदक जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में नियमित रूप से अपना आयकर रिटर्न दाखिल किया है अधिकतर बैंक/वित्तीय संस्था उन्हे लोन के लिए प्राथमिकता देते हैं। बता दें आयकर विभाग के साथ एक विस्तृत इतिहास ऋणदाता के लिए एक अहम कारक होता है, इससे सिबिल और ऋणदाता किसी सरकारी एजेंसी से आवेदक की जानकारी को आसानी से सत्यापित कर सकते हैं।

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डिफॉल्टर से मेल खाता विवरण

जैसा की कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान उधारकर्ता को लोन देने से पहले उसके पेमेंट और क्रेडिट संबंधित जानकारी को इकट्ठा कर लेते हैं। जिसमे उधारकर्ता का सम्पूर्ण व्यक्तिगत विवरण जैसे नाम, पता, आयु, रोजगार आदि शामिल होता है। ऐसे में यदि उधारकर्ता का कोई भी विवरण किसी क्रेडिट या ऋण डिफॉल्टर के विवरण से मेल खाता है तो उनका आवेदन अच्छे सिबिल स्कोर के बाद भी रिजेक्ट हो जाता है। उदाहरण के लिए कई मामलों में उधारकर्ता के घर का पता इसका कारण हो सकता है, क्योंकि यह पता पहले किसी डिफॉल्टर का हो सकता है और ऐसे में जब ऋणदाता को यह पता दिखाई देता है, तो वह ऋण जोखिम से बचने के लिए ऋण को अस्वीकार करना एक बेहतर विकल्प समझता है।

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